तेरी मेरी मुलाकात देख हवा में भी नमी सी है क्षण भर का रहा साथ अब फिर तेरी कमी सी है - Srishti Garg ( क़तरा ) Photograph by Alwina Kathuria.

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धूल

एक अलग बात होती है उन कमरों में जो काफ़ी समय बाद खोले जाते हैं एक भीनी महक होती है उनमें कुछ अलग सी समझा भी नहीं सकती और धूल की एक पतली चादर से ढ़के मिलते हैं खोलने पर बिलकुल उस दिल की तरह जो अरसों बाद खुला हो। - Srishti Garg ( क़तरा … Continue reading धूल

अधूरी रह गई थी जो एक दास्ताँ तुम्हारी मेरी आज सामने आ खड़ी है अंजाम जानना चाहती है कहो तो बता दूँ कहो तो टाल दूँ एक बार और कोशिश कर लूँ उसे झूठ-मूठ बहलाने की एक लम्हे का साथ दिखाकर उसकी तमन्ना निपटा दूँ या फिर अबकी बार तुमने लौट आने का सोचा है? … Continue reading